राकेश भारती प्रधान संपादक CG आज की आवाज न्यूज कुसमी/बलरामपुर ।
कुसमी महाविद्यालय अंतर्गत तीन प्राध्यापिकाओं डॉ लक्ष्मी सिंह, विनीता केरकेट्टा, अर्पणा एक्का अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध आयोजनों में भाग लेकर विशिष्ट पुरस्कार एवं सम्मान कर महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया हैं।
ज्ञात हो कि 26 एवं 27 फरवरी को जशपुर स्थित शासकीय विजयभूषण सिंह कन्या महाविद्यालय में इंटीग्रेटिंग , बायोडायवेसिटी ,एनवायरमेंट प्रोटेक्शन ट्रेडिशनल नालेज फोर सस्टेनेबल फ्यूचर विषय पर आयोजित अंतराष्ट्रीय सेमिनार में कुसमी स्थित महाविद्यालय प्राचार्य सहित अन्य प्राध्यापकों ने भाग लिया, साथ ही तीन प्राध्यापिकाओं ने शोध पत्र को प्रस्तुत किया , सेमिनार में देश एवं विदेश से आए वैज्ञानिकों शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने बायोडायवसिटी सहित जल जंगल एवं जमीन के संरक्षण को लेकर गहन विचार विमर्श किया गया , सेमिनार के मुख्य वक्ता विश्व में जल एवं और संरक्षण के लिए विख्यात जल एवं पर्यावरण के लिए विख्यात जल पुरुष के नाम से जाने वाले डॉ राजेंद्र सिंह रहें । ज्ञात हो कि जल संरक्षण के लिए डॉ सिंह को 2001 में रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड 2005 में जमनालाल बजाज अवार्ड मिला है 2008 में द गार्जियन ने उन्हें ऐसे 50 लोगों की सूची में उन्हें शामिल किया जो पृथ्वी को बचा सकते है , इसके अलावा 2015 में इन्हें स्टॉकहोम जल का नोबेल पुरस्कार वॉटर पुरस्कार 2018 में हाउस ऑफ कॉमन्स यूनाइटेड किंगडम में अहिंसा सम्मान , 2019 में अमेरिका सिएटल से अर्थ रिपेयर के साथ न्यू दिल्ली में पृथ्वी भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया ।
अपने उद्बोधन में इनके द्वारा बताया गया कि इनके दशकों के अनवरत प्रयत्नों से राजस्थान के अलवर सहित चंबल क्षेत्र में जल संरक्षण के प्रयासों से वहां के लोगों को नई दिशा मिली , इनके द्वारा बताया गया है छत्तीसगढ़ ईश्वर का लाडला प्रदेश है जहां आज भी घनघोर जंगल बचा हुआ है , जो यहां के लिए बहुत बड़ी बात है ,मगर इन जंगलों का संरक्षण करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है , डॉ सिंह ने बैज्ञानिक तथ्यों के साथ जल संरक्षण के तौर तरीकों को बताया , इनके द्वारा बताया गया कि वृक्षारोपण से पर्यावरण के साथ साथ जल संरक्षण का सबसे उपयुक्त एवं सशक्त माध्यम बताया गया , पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर सनातन विकास की ओर उन्मुख होने पर जोर दिया गया ।


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